माया -1 माया क्या है वैदिक, शिव पुराण, आधुनिक विज्ञान से समझिए। सर्वप्रथम इसको शिव पुराण के अनुसार समझते हैं। शिव ने महामाया को अपने शरीर से उत्पन किया। महामाया ने एक माया रची इसी माया से स्त्री का जन्म हुआ, और इसी माया ने इस संसार को अपने वश में कर रखा है। यह माया कभी किसी के वश में नहींआ सकती है ना कोई इसकी गहराई समझ सकता है। माया का फैलाव अंतहीन है। सिर्फ शिव पुराण की इसी कथा से आधुनिक विज्ञान के कई पहलू समझे जा सकते है। जैसे प्रकाश की गति। प्रकाश की गति तीन लाख किलोमीटर प्रति सेकंड है और कोई भी वस्तु इसकी गति के बराबर नहीं चल सकती। अब इसका एक रहस्य समझिए। मान लें आप एक जगह खड़े हैं और आपके हाथ में टॉर्च है आप इस टॉर्च को एक पल के लिए फ़्लैश करते हैं एक लाइट का पुंज निकलता है और आपसे दूर तीन लाख किलोमीटर प्रति सेकंड की गति से दूर चला जाता है। अगर आप इसकी जगह मान ले एक फुटबाल मान लो 100 किलोमीटर प्रति सेकंड की गति से दूर फेंकते हो तो वह आपसे 100 किलोमीटर प्रति सेकंड दूर जाएगा। लेकिन अगर आप साथ साथ फुटबॉल के 30 किलोमीटर प्रति सेकंड दौड़ना शुरू कर दो तो फुटबॉल कि गति अब आपके मुकाबले 70 किलोमीटर प्रति सेकंड ही रहेगी। अब अगर ऐसे ही आप लाइट के उस पुंज के साथ साथ 2 लाख किलोमीटर प्रति सेकंड से दौड़ना शुरू कर दो तो अब लाइट की गति आपके मुकाबले सिर्फ 1लाख किलोमीटर प्रति सेकंड रह जाएगी । लेकिन ऐसा नहीं होगा आप चाहे लाइट पुंज के मुकाबले चाहे जितना मर्जी तेज दौड़ो लाइट हर बार आपके मुकाबले 3 लाख किलोमीटर प्रति सेकंड की गति से ही आगे जाएगी। आपके हाथ की टॉर्च से निकलने वाली लाइट हमेशा आपके मुकाबले 3 लाख किलोमीटर प्रति सेकंड की गति से ही आगे जाएगी। लाइट के केस में गति विज्ञान का हर नियम फेल हो जाएगा। इसीलिए लाइट की गति को एब्सोल्यूट माना गया है। इसका मुकाबला इस दुनिया में किसी भी वस्तु की गति नहीं कर सकतीं। और लाइट जो जितना दूर जाती जाएगी उतना फैलती जाएगी। मतलब माया किसी के वश में नहीं और माया अंतहीन है। अब इसी माया को स्त्री पुरषों के संबध में समझते है। क्योंकि महामाया ने ही स्त्री को भी उत्पन किया है। जब कोई पुरष किसी स्त्री के प्रेम में फस जाता है तो भी यही हाल होता है। हर पत्नी यही कहेगी की इनको मेरे लिए समय ही नहीं है अब आप सब काम छोड़ कर स्त्री के साथ प्रेम करने बैठ जाए तो स्त्री कहेगी ये मेरा पीछा ही नहीं छोड़ते इनको कोई काम धाम ही नही है। मतलब स्त्री हमेशा आपको हर बात पर उलझा कर ही रखेगी। जो मांगेगी वह हाज़िर कर दो तब भी थोड़ी देर में कोई और पंगा खड़ा कर देगी। मतलब अगर कोई भी पुरष स्त्री के पीछे जितना मर्जी भाग ले जितना वह उसके पीछे भागेगा वह हर बार उससे आगे ही रहेगी। इसलिए कोई भी पुरष किसी स्त्री को कभी भी पूरी तरह से संतुष्ट नहीं कर सकता। यह स्त्री पुरष का रिश्ता सिर्फ मनुष्यों के आधार पर ही नहीं समझना चाहिए हमारे वैदिक ज्ञान में यह स्त्री पुरष रिश्ते की बात सभी जीवों के मेल फीमेल रिश्तों में लागू होती है। यही थी ब्रम्हा की सेक्सुअल reproduction या मथैनुनी सृष्टि का आधार।#माया_सीरीज_गोपाल_कपूर2 आप अगर स्त्री के मुकाबले स्थिर बने रहोगे तो स्त्री आपको स्थिर भी नहीं रहने देगी। जितना मर्जी सिर पीट लो स्त्री कभी आपके वश में नहीं आ सकती। इस लिए जो पुरष अपने उद्देश्यों से भटक कर स्त्री के पीछे भागा रहता है वह कभी अपने उद्देश्यों को प्राप्त नहीं कर सकता। इसलिए आप स्थिर बन कर रहो। जिस भी स्त्री से जितना भी समय आपका रिश्ता लिखा है उतने समय के लिए अपने आप बन कर रहेगा। अगर टूटना लिखा है तो टूट कर ही रहेगा। क्योंकि स्त्री भी माया या शक्ति का ही एक रूप है जिसको पार पाना पुरष के वश में नहीं। और जो स्त्री आपसे जितना दूर जाएगी उसका फैलाव आपके व्यक्तित्व पर उतना ही विशाल होता जाएगा। मतलब माया का फैलाव या प्रकाश का फैलाव ज्यादा दूरी से और ज्यादा हो जाता है। इसीलिए अगर कोई लड़का निठ्ठला बैठा रहता है तो ब्जूर्ग लोग कहते हैं इसकी शादी करवा दो मतलब इसकी पूंछ में आग लगा दो। जब माया में उलझेगा तो माया के पीछे भागने लग जाएगा और कुछ ना कुछ करने लग जाएगा। इसी तरह से कोई छोटा लड़का जी तीन तीन दिन बिना नहाए धोए आराम से स्कूल जाता है जब उसका किसी लड़की से अट्रैक्शन होना शुरू होता है तो वह बिना सजे सवरें घर से बाहर भी नहीं निकलता। बाकी की डिटेल मैं इसके पार्ट -2 में लिखूंगा।
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