माया, स्त्री , शक्ति या ऊर्जा ये एक ही है:- पार्ट -1 स्त्री ही किसी परिवार,समाज की संरचना कैसी होगी यह तय करती है। स्त्री ही परिवार समाज की ऊर्जा होती है। शक्ति के बिना शिव शव है यह बात आपने कई बार सुनी होगी, पुरुष के लिए भी यही सत्य है। अगर जैसे कोई भी ऊर्जा जैसे बिजली, बहते पानी की काइनेटिक एनर्जी, ऊंचाई पर स्थित पानी की पोटेंशियल एनर्जी, परमाणु ऊर्जा, अग्नि अगर नियंत्रित है तो वह निर्माण करती है लेकिन अगर ये ऊर्जाएं अनियंत्रित हो जाए तो विनाश करती है। यथा देह यथा ब्रह्माण्ड यह यजुर्वेद में लिखा है। इन्हीं शब्दों से आप जीवन और ब्रह्मांड का रहस्य जान सकते हैं। अगर शक्ति शिव के साथ मां पार्वती के रूप में है तो शांति प्रेम, लेकिन अगर अनियंत्रित हो कर मां काली का रूप धारण कर लें तो विनाश। आप आज के समय के संदर्भ में ही देख लीजिए। हर समाज में मुस्लिम समाज को छोड़ कर रिश्तों , संतान उत्पन करने में त्राहिमाम मचा हुआ है। कारण मनुस्मृति हो चाहे बाइबल हो चाहे कुरान हो। इस्लाम हो या क्रिश्चिनिटी चाहे मनुस्मृति हो , सब में स्त्रियों पर कोई न कोई प्रतिबंध लगाए गये थे अर्थात् ऊर्जा को नियंत्रित रखने के नियम बनाए गए थे।लेकिन मनुस्मृति में स्त्री को पूजनीय भी बताया हुआ है अर्थात् समाज की संरचना करने वाली स्त्री शक्ति को सम्मान देने की बात लिखी है। लेकिन आधुनिक शिक्षा , कानूनो से हिंदू समाज और ईसाई समाज बदल गया, लेकिन मुस्लिम समाज अपने नियमों पर कायम रहा। यही कारण है हिंदू समाज और ईसाई समाज बिखर चुका है जबकि मुस्लिम समाज आज भी संगठित है। क्योंकि उन्होंने स्त्री अर्थात बैटरी या ऊर्जा को उन्हीं नियम के तहत नियंत्रण में रखा हुआ है। जिस दिन मुस्लिम समाज यह नियंत्रण खो देगा उनका समाज भी इसी प्रकार बिखर जाएगा।
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