माया (भाग-11):- माया सीरीज के लेखों में मैंने स्त्री या माया या ऊर्जा के बारे में मैंने पिछले दस भागों में बहुत कुछ लिखा है लेकिन इस भाग में मैं आपको बताना चाहता हूँ कि आप किसी स्त्री या माया या ऊर्जा को हमेशा कैसे अपने साथ प्रेम बनाये रखने को बाधित कर सकते हैं। जैसा मैंने अपने कई लेखों में लिखा है स्त्री या माया या ऊर्जा चाहे मनुष्य या कोई और जीव में। किसी भी स्त्री के जीवन का मूल उद्देश्य संतान उत्पन करना होता है। इसलिए हमारे उपनिषदों में स्त्री को जो सबसे बड़ा आशीर्वाद ऋषि मुनि देते थे वह यह था “ जाओ तुम्हारे दस पुत्र उत्पन्न हो और ग्यारहवाँ पुत्र तुम्हारा पति बन जाए!” इसी आशीर्वाद में स्त्री का सच्चा प्रेम हासिल करने का रहस्य छिपा हुआ है, अर्थात् जब कोई स्त्री आपको अपने पुत्र की भाँति समझ कर आपसे अपने पुत्र की तरह व्यवहार करने लग जाए तो इसका अर्थ होता है उस समय वह आपसे पूर्ण प्रेम करती है। इसलिए आपको भी अपनी पत्नी या प्रेमिका से जितना समय सम्भव हो सके एक शरारती बच्चे की भाँति व्यवहार करना चाहिये।अर्थात् हर समय जिस प्रकार एक छोटा बच्चा अपनी माँ को तंग करता रहता है शरारत करता रहता है , मार खा कर गाली सुन कर भी प्रेम से चिपटता रहता है। इस प्रकार उस स्त्री का मन भी आपके पीछे भागता रहेगा। कभी भी रौब, अपनी संपन्नता , धन सम्पति ज्ञान का दिखावा करने से कभी आप किसी स्त्री का प्रेम नहीं पा सकते। इसलिए आपको एक छोटे बच्चे की तरह मासूम शरारती बनना होगा।#माया_सीरीज_गोपाल_कपूर2
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