माया भाग 13 जैसा मैं लिखता रहा हूं शक्ति या स्त्री या माया बिन पुरुष एक निर्जीव सर्किट है, यह सर्किट सिर्फ स्त्री रूपी शक्ति की बैटरी के अनुसार ही चलता है। जैसे वोल्टेज वैरिएशन ही कंप्यूटर में करेंट या नो करेंट के रूप में बाइनरी सिगनल अर्थात 0 या 1 के कोडिंग के रूप में विचार कार्य करने की क्षमता उत्पन करती है AI भी इसी रूप में चलती है। अगर किसी पुरुष को कोई स्त्री किसी प्रकार से खजल, तंग या प्रेम या नफरत या घृणा कुछ न करे तो कोई भी पुरुष अपने जीवन में बीड़ी पीने के अलावा कुछ भी नहीं कर सकता। आपने देखा होगा जब कोई स्त्री किसी के जीवन में होती है तो उसका मूड हर 2.5 दिन में बदल जाता है, यह एक हार्मोनल साइकिल होता है जो चंद्रमा की गति अनुसार कार्य करता है। आपको स्त्री हमेशा अपने इमोशन से नियंत्रित करती है, कभी रोना धोना, कभी गिले शिकवे, कभी लड़ाई झगड़ा कभी कई तरह की डिमांड ये चाहिए वो चाहिए। कभी गले लग कर रोना, प्रेम करना कभी झगड़ कर दूर कर देना , इन सभी प्रोसेस से वह एक प्रकार से आपको शक्ति रूपी वोल्टेज वैरिएशन देकर आपको एक कोड एक्जीक्यूट करने के लिए मजबूर करती है, और आप उसी के द्वारा दी गई ऊर्जा या कोडिंग के अनुसार सिर्फ एक AI रोबोट की तरह कार्य करते है। अगर आप यह समझते हैं कि किसी ऊंचे पद पर बैठा व्यक्ति या बड़ा संत बाबा या किसी भी धर्म का कोई धर्माचार्य स्त्री से संबंध नहीं रखता और वह तो ब्रह्मचारी है तो आपकी सोच गलत है, अगर ऐसा होता तो वह कोई भी कार्य नहीं कर पाता। जितना खिला हुआ चेहरा होगा उतने ज्यादा स्त्रियों से उसके संबंध होंगे। अगर वह व्यक्ति किसी स्त्री से संबंध में नहीं होता तो सिर्फ अपने जीवन में सिर्फ बीड़ी पीता हुआ गरीब ही होता वह किसी पद पर बैठ ही नहीं पाता। दूसरी बात खिले हुए चेहरे सिर्फ उसी स्त्री के होते हैं जो एक साथ कई पुरुषों को नियंत्रित करती है, बुझा हुआ चेहरा कलियुग में सत्य का होता है, झूठ के चेहरे पर ही रौनक होती है । पुरुषों को निंयत्रित करने वाली स्त्री आपकी हमेशा सुंदर दिखेगी। #माया_सीरीज_गोपाल_कपूर2
Comments (2)
हम पहले यह सब समझ नही पाये ऐसा क्यू आप की Post पढ़करअब धीरे धीरे मन की उलझन खत्म हो गई आप धन्यवाद
Thanks