माया पार्ट -2 :- जैसा कि मैने पार्ट वन में लिखा था कि मनुष्यों के लिए स्त्री ही माया का रूप है। जिसको भी ऐसी स्त्री मिल जाए जो स्थिर स्वभाव की हो वह पुरष जीवन के बाकी क्षेत्रों में उतना ही ऊंचा जा सकता है। लेकिन माया स्थिर नहीं हो सकती इसलिए जीवन में उतार चढ़ाव आना #माया_सीरीज_गोपाल_कपूर आवश्यक हैं। इनको आप नहीं रोक सकते। अब जब हम किसी माया में उलझ जाते हैं।तो हमारी सारी ऊर्जा शक्ति तन की भी और मन की भी सिर्फ उसी माया को संभालने में लगी रहती है। आप संसार में देख सकते है कि बड़े बड़े पुरष सिर्फ इसी माया के सहारे बड़े भी बनते हैं और गिर भी जाते हैं। जब माया आप में प्रवेश करती है मतलब कोई स्त्री आपको सच्चा प्रेम करने लगती है तो जीवन आनंदमय होने लगता है और जीवन में आप दूसरे काम में भी तरक्की प्राप्त करने लगते हैं। लेकिन जैसे ही माया आप से बाहर या दूर जाने लगती है तो आपका जीवन मन और तन दोनों से कष्टकारी होने लग जाता है। चाहे आपको पता हो या नहीं कि जो स्त्री आपके जीवन में है वह आपसे अंदर ही अंदर दूर जा रही है। अब इसको दूर जाने से भगवान भी नहीं रोक सकता क्योंकि माया है ही चंचल। सांसारिक जीवन में सभी सुखों और दुखों का कारण माया या स्त्री ही होती है। स्त्री ही जन्म देती है, स्त्री ही पूरे आपके सांसारिक जीवन का आधार होती है। अब बहुत से प्रेमी जोड़े या पति पत्नी आपस में बहुत लड़ते रहते हैं।कई पति पत्नी में तलाक तक की नौबत आ जाती है पुलिस कोर्ट कचहरी चली रहती है। इन सबका कारण सास बहू ननद भाभी आदि के रिश्ते या अवैध रिश्ते कारण होते हैं। अब आगे कि बातें मै सिर्फ पुरषों के लिए लिख रहा हूं कृप्या स्त्रियां नाराज़ ना हों।उनके लिए मैं अलग से मोह नाम कि सीरीज लिखने जा रहा हूं। किसी भी पुरष से दो स्त्रियों का रिश्ता बलैंस करना ही सबसे मुश्किल काम होता है। क्योंकि एक माया दूसरी माया को कभी भी बर्दास्त नहीं कर सकतीं मतलब दो स्त्रियां जैसे सास बहू का रिश्ता। क्योंकि वे दोनों किसी भी पुरष को सिर्फ अपनी और ही खींचती हैं। बस आपको बीच से हट जाना है और आगे बताया गया उपाय करना है। इस स्थिति से कैसे बचा जाए इसका वेदों में बहुत अच्छा उपाय है। जैसे आपने देखा है को शिव पार्वती का जोड़ा सबसे उत्तम माना गया है। लेकिन इस जोड़े में भी गंगा और गौरी का झगड़ा होता है। अब गंगा के रूप को ही शिव पार्वती को हमेशा अपने साथ जोड़े रखने के लिए इस्तेमाल करते हैं। मतलब गंगा को सिर पर धारण किया अर्थात दिमाग से गंगा को पत्नी माना। लेकिन संसार में पार्वती को। अब जो मै उपाय बताने जा रहा हूं वह सिर्फ बुद्धिमान पुरष ही समझ सकते हैं। आपको अपनी एक काल्पनिक दुनिया में एक अपनी मनपसंद कल्पनिक स्त्री की कल्पना करनी है और उसको अपनी पत्नी स्वीकार करना है। जब भी अपने लाइफ पार्टनर के बारे में सोचना है तो उसी काल्पनिक स्त्री के बारे में सोचना है हर चीज में। और जो आपकी सांसारिक पत्नी है उसकी अपनी पड़ोसन समझना है। अब जो आपकी सांसारिक पत्नी है वह यह कभी समझ नहीं पाएगी की उसकी प्रतिद्वंदी कौन है। वह अपनी सारी ऊर्जा उस काल्पनिक स्त्री के पीछे लगा देगी। इससे वह आपसे अपनी सास ननद आदि से अपना फोकस हटा लेगी। और आपको पूर्ण रूप से प्राप्त करने के लिए आपसे प्रेम बढ़ाना शुरू कर देगी। लेकिन आपने हमेशा अपना प्रेम उसी काल्पनिक स्त्री से करना है।#माया_सीरीज_गोपाल_कपूर2 जब तक आप ऐसा करते रहेंगे आपकी पत्नी बाकी सब से झगड़े भूल कर सिर्फ आपकी कल्पना में छाई स्त्री को ढूंढती रहेगी और आपको पूर्ण रूप से प्राप्त करने के लिए आपके आगे पीछे नाचती रहेगी।
Comments (0)
Be the first to comment.