माया ( भाग -6):- मेरा यह लेख वही समझ पायेंगे जिन्होंने इस सीरीज के पहले पाँच भाग पढ़ लिए हैं। माया, स्त्री और इच्छाएँ यही ऊर्जा का स्रोत है जिससे कोई पुरष कर्म करने के लिए मजबूर होता है। क्योंकि पुरुष एक निर्जीव सर्किट की तरह होता है और स्त्री उसके लिये बैटरी। आप कई बार देखते हैं कि अस्सी अस्सी साल की आयु के नेता या कोई बड़े व्यापारी या कलाकार में इतनी ज़्यादा ऊर्जा होती है कि जितनी एक पचीस साल के युवा में भी नहीं होती। इनकी इस ऊर्जा का स्रोत क्या है क्या आप कभी समझ पाए। यदि पैसे से ऊर्जा मिलती तो बहुत ज़्यादा पैसे वाले लोग एक आयु के बाद सीढ़ियाँ तक ढंग से नहीं चढ़ पाते। यदि योग व्यायाम से इस प्रकार की ऊर्जा आती तो मैं बहुत से लोगों को सुबह सुबह चार बजे सैर योग व्यायाम करते देखता हूँ लेकिन वे भी इतने ऊर्जावान नहीं होते। जबकि मैने ऐसे कई अस्सी अस्सी साल के नेता लोग देखें हैं जो खूब खाते पीते है ( दारू, मुर्ग़ा ) लेकिन वे इतने ज़्यादा ऊर्जावान है कि वोट माँगने के लिये कई कई किलोमीटर पहाड़ की चढ़ाई उतराई आराम से पैदल नाप लेते है और उनके साथ घूमते हुए युवा कार्यकर्ता की भी सांस फूल जाती है। ऐसा क्या आपने कभी सोचा ऐसा क्यों होता है। इसके पीछे माया वाला रहस्य छिपा पड़ा है जिसके बारे में मैने मानसिक ऊर्जा ट्रांसफ़र वाले लेखों में बताया था।मैं उस सीरीज के पार्ट चार को यहाँ कॉपी पेस्ट कर रहा हूँ शायद उससे आप कुछ कुछ समझ जाएँ इससे ज़्यादा ओपन हो कर मैं ज़्यादा नहीं लिख सकता। मानसिक ऊर्जा का ट्रांसफ़र (भाग चार):- जैसा मैं हर बार बता चुका हूँ पुरुष सर्किट और स्त्री बैटरी होती है। यदि दो पुरुषों के बीच मानसिक ऊर्जा का लेन देन करना हो तो उनका सम्बन्ध किसी एक स्त्री के द्वारा बनता है और दो स्त्रियों के बीच मानसिक ऊर्जा का लेन देन बीच में किसी पुरुष के होने के कारण बनता है। शायद आपको मेरी ये बातें बहुत अजीब लगे। इसलिए मैं इन बातों को उदाहरण से बताता हूँ। जैसे मैंने एक बहुत आलसी,मोटे थुलथुले , लड़के की कुंडली देखी वह लड़का बहुत ज्ञानी स्थिर स्वभाव का और बहुत ज़्यादा पैसा कमाता था । आप उस लड़के का नाम A रख लें याद करने के लिए। उस लड़के ने पूरे जीवन कभी दौड़ नहीं लगाई थी ना कभी किसी प्रकार का व्यायाम किया था ना उसे इन बातों में कोई रुचि थी। उसका किसी लड़की से चक्कर चल पड़ा शायद लड़की उसके धन पैसों से प्रभावित थी। कुछ दिनो बाद उस लड़के को स्मार्ट और फिट बनने का भूत सवार हो गया उसने जिम जाना शुरू कर दिया और बहुत ज़्यादा व्यायाम करने लग गया। उसके मित्र बहुत परेशान हुए कि इस बंदे को क्या फ़र्क़ पड़ गया। लेकिन इस चक्कर में उसने अपने काम काज पर ध्यान देना कम कर दिया और उसकी कमाई कुछ कम हो गई। अर्थात् कुछ गुण मिले और कुछ गुण कम हो गये। लेकिन मैं ठहरा ज्योतिषी मैंने उसकी कुंडली से पता लगा लिया कि इसकी जो गर्ल फ्रेंड बनी है उसका टाँका पहले से किसी दूसरे लड़के से था जो कोई भी पैसा नही कमाता था लेकिन बहुत ज़्यादा बॉडी फ़िटनेस पर ध्यान देता था हमेशा जिम व्यायाम करता था, और बहुत मोटी बुद्धि का था। उसका नाम आप याद रखने के लिये B रख लें। मैं उस लड़के को भी जानता था मैने उसका वर्तमान व्यवहार देखना शुरू किया और पाया वह अब हर बात को मोटी बुद्धि से ना सोच कर काफ़ी गंभीरता से सोचने लग गया था और पैसे कमाने के लिए काम काज करने लग गया था, लेकिन इस चक्कर में उसका जिम जाना कम हो गया था और उसकी बॉडी फिटनेस पहले मुक़ाबले कम हो गई थी। अब आप इसका अर्थ समझें जब दोनों लड़कों के साथ बीच में एक लड़की दोनों के साथ एक दूसरे की जानकारी के बिना सबन्ध में थी तो उस लड़की के माध्यम से उन दोनों लड़कों के बीच मानसिक ऊर्जा का आदान प्रदान हुआ। जो गुणA के पास ज़्यादा थे वे B में गए और B के गुण A में। तभी यजुर्वेद में लिखा है यथा देह यथा ब्रह्मांड। जो नियम विज्ञान के बाहरी संसार में लागू होते है वही सारे नियम हमारी मानसिक ऊर्जा के मामले में भी लागू होते हैं। इसलिए जब भी जीवन में कोई बड़ा परिवर्तन आता है तो इसका अर्थ कहीं ना कहीं इसी तरह से कोई मानसिक ऊर्जा का लेन देन हो रहा होता है चाहे आपको मालूम हो या नहीं। इलीट क्लास के लोग जाने अनजाने में अपनी कमियों को पूरा करने में इस विधि का भरपूर इस्तेमाल करते हैं , लेकिन खोखली आदर्शवादी मिडल क्लास की सोच के लोग यदि अनजाने में भी उनके जीवन में इस प्रकार की घटनाएँ हो जाये तो इससे डिप्रेशन, अग्रेशन का शिकार हो जाते हैं और लड़ाई झगड़े करते रहते हैं। इसलिए कहते हैं ज्ञान का इस्तेमाल भी किया जा सकता है और इसका बुरा प्रभाव भी हो सकता है। अब यदि बंदर के हाथ में नारियल आ जाये तो वह उससे अपना सिर ही फोड़ सकता है। जितनी बातें में पुरुषों के लिए लिख रहा हूँ यही नियम वाईस वरसा स्त्रियों पर भी ऐसे ही लागू होते हैं। यह प्रयोग सभी धर्मों के गुरु ( सभी नही) करते हैं । जैसे इस्लाम में कुछ मुल्ला मौलवी हलाला तकनीक और ईसाईयत में कुछ पादरी पिता से माफ़ी के नाम पर इस बात का ग़लत इस्तेमाल करते हैं और यही विद्या हिंदुओं के कुछ धर्मगुरुओं ने भी अपना ली है। लेकिन सनातन में इस तकनीक का इस्तेमाल ग़लत कहा गया है। एक पुराने धर्म ताओ चीन में इस तकनीक को यिन येन नाम से इस्तेमाल किया जाता था। #माया_सीरीज_गोपाल_कपूर2
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