माया ( भाग 7):- “ यथा देह यथा ब्रह्मांड “ हमारे वेदों में लिखा है। अर्थात् जो नियम बाहरी संसार में भौतिकी , स्पेस ,रसायन विज्ञान में लागू होते हैं वही नियम हम मनुष्यों के जीवन और मानसिकता पर भी लागू होते हैं। जैसे आपने क्या कभी सोचा है पानी क्यों बहता है? ऊर्जा जैसे गर्मी ( हीट) ज़्यादा तापमान से कम तापमान की ओर क्यों बहती है। प्रकाश अपने स्रोत से अंधेरे की ओर क्यों बहता है। क्योंकि संसार का नियम है हर चीज़ हर वस्तु स्थिर होना चाहती है एक समान फैलना चाहती है, एक समान बंटना चाहती है। और हर चीज हर वस्तु हर तरह एक समान फैलने के लिए ऊर्जा प्रवाह का सहारा लेती है। जैसा मैं इस सीरीज के लेखों में कई बार लिख चुका हूँ की मनुष्य जीवन में स्त्री या माया या इच्छाएँ ही ऊर्जा का रूप है तो ज़ाहिर है वह भी प्रकृति के नियम के अनुसार वही काम करेगी। यदि आप एक पुरुष हैं और ऊँची मानसिक स्थिति के व्यक्ति हैं या ऊँचे व्यक्तित्व या किसी भी स्थिति में ऊँची जगह स्थित है चाहे पद चाहे , प्रतिष्ठा चाहे किसी और क्षेत्र में तो आपको अपने से जुड़ी किसी भी स्त्री से ( चाहे वह माँ हो, बहन हो या प्रेमिका हो या पत्नी हो) आपको हमेशा एक शिकायत होगी कि वह स्त्री लेती तो सब कुछ आपसे है लेकिन देती किसी दूसरे को है। हर माँ के काबिल बेटे को शिकायत होती है कि माँ मेरे दूसरे भाई को ज़्यादा प्रेम करती है जो कुछ नहीं करता घर के लिये , जबकि मैं सब कुछ करता हूँ घर की हर स्थिति की ज़िम्मेवारी उठाता हूँ और मेरा वह भाई घर के लिए कुछ नहीं करता और माँ हर समय उसे ज़्यादा महत्व देती है। लेकिन यह स्थिति तब बहुत दुखदाई बन जाती है किसी पुरुष के लिए जब यही काम उसकी प्रेमिका या पत्नी करती है। जो व्यक्ति ऊपर के लेवल का होता है वह कभी अपनी प्रेमिका या पत्नी से प्रेम ( दिल से, दिखावा ज़रूर हो सकता है) नहीं पा सकता क्योंकि यह प्रकृति के नियम के विरुद्ध है । क्योंकि वह ऊँचे लेवल पर है , जिस प्रकार से ऊँची रखे पानी के टैंक रूपी पुरुष से स्त्री रूपी पाइप जुड़ी हो तो स्त्री रूपी पाइप अवश्य किसी निचले लेवल पर रखे दूसरे पुरष से जुड़ी होगी। और नियम के अनुसार वह स्त्री रूपी पाइप ऊपर रखे टैंक से पानी ख़ाली करके नीचे रखे टैंक को भरेगी। इस कारण ऊँचे व्यक्तित्व का पुरुष सदैव इस बात को लेकर दुःखी रहता है कि वह अपनी प्रेमिका या पत्नी के लिये सब कुछ करता है लेकिन उसकी पत्नी या प्रेमिका उसे महत्व ना देकर किसी दूसरे पुरुष को महत्व क्यों देती है। यह दूसरा पुरुष उससे किसी भी रिश्ते में जुड़ा हो सकता है। मेरी यही बातें वाईस वरसा नियम के तहत स्त्रियों के लिये भी लागू होती है। संसार में सारे मानसिक दुःखों का कारण यही माया अर्थात् स्त्री और मोह अर्थात् पुरुष के बीच के संबन्धों के इस लोचे के कारण होते है और इनमें कभी स्थिरता नहीं आ सकती । इसलिए संसार में सच्चा प्रेम नामक वस्तु खोजने का प्रयत्न ना करे क्योंकि स्थिरता सृष्टि का नियम नहीं है। इसलिए किसी स्त्री को सच्चा प्रेम करने वाले पुरुष ( केयरिंग बॉय) यह ज़रूर सोच लें आपके सच्चे प्रेम की यह ऊर्जा ज़रूर किसी प्ले बॉय को ट्रांसफ़र हो रही है एंड वाईस वरसा। #माया_सीरीज_गोपाल_कपूर2
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