किसी भी लेवल या ग्लैंड या चक्र पर फोकस रहने की विधि बिना योग या बिना किसी गुरु के:- पार्ट टू लेवल दो या रेनल ग्लैंड या स्वाधिस्थान चक्र पर यदि कोई व्यक्ति फोकस हो जाए तो वह एक अच्छा खिलाड़ी बन सकता है या अच्छा दौड़ धूप करने वाले काम आसानी से कर सकता है या अच्छा ट्रैकर बन सकता है। इसके लिए हमारी रेनल ग्लैंड से निकलने वाले उत्साह या भय के हार्मोन के कारण ऐसा होता है। लेवल दो पर फोकस व्यक्ति की पहचान यह है कि हमारी मंडयाली भाषा में हम ऐसे व्यक्ति को कहते हैं इस इसके .... पर भूरा बाल है। रैश ड्राइवर भी इसी लेवल पर फोकस होते है। जैसे बाइक स्टंट करने वाले। ऐसे व्यक्ति हर समय उछल कूद या सैर सपाटा करने में माहिर होते हैं। इस लेवल पर आपको फोकस होने के लिए कुछ आदतें अपनानी पड़ती है। आपको किसी एक जगह तीन मिनट से ज्यादा स्थिर नहीं बैठना है। और अपनी सांस लेती बार यह ध्यान रखना है की आपकी सांस अंदर जाती बार ऐसा महसूस करना है कि सांस पेट के निचले हिस्से तक पहुंच रही है। लेकिन सांस लेती बार यह ध्यान करना है की सांस उल्टी खींचनी है मतलब सांस अंदर जाती बार छाती फूलनी चाहिए पेट अंदर। यह योग से बिलकुल उल्टा है। जैसा की सांस लेने का तरीका आर्ट ऑफ लिविंग में बताते हैं। क्योंकि लेवल टू क्रांति के लिए होता है शांति के लिए नही। जबकि आर्ट ऑफ लिविंग में बताए जाने वाले सांस लेने का तरीका शांति के लिए होता है। अब आपको खुद तय करना है शांति चाहिए या क्रांति। अगर आपने कभी कराटे सीखें हों तो आपको पता होगा की शरीर में ऊर्जा लेवल बढ़ाने के लिए योये में सांस उल्टी खींची जाती है जिससे फाइटिंग स्पिरिट बढ़ती है। इसी तरीके का इस्तेमाल करके मैं अपने शरीर पर दो तीन व्यक्तियों को चढ़ा देता हूं जो मेरे पर उछल कूद कर लेते हैं जैसा की आपने मेरे प्रोफाइल पिक या वीडियो में देखा होगा। आपको पैसों के बारे में आने वाली किसी भी समस्या के बारे में कोई भी विचार नहीं करना होता है। अगर ऐसे विचार आएं भी तो एकदम से उन विचारों का त्याग कर देना है। जैसे ही आपको मान लें कोई आपको आधी रात में भी कहे कि सामने वाले पहाड़ पर चढ़ना है तो आपकी मानसिकता ऐसी बनानी है कि बिना कुछ सोचे समझे तुरंत चल देना चाहिए। अगर आप ऐसी प्रैक्टिस कर कर के यह आदत डाल दें तो आप लेवल दो या रेनल ग्लैंड या स्वाधिस्थान चक्र पर फोकस हो सकते है। कहीं भी आने जाने के लिए कोई किंतु परंतु नहीं करनी बल्कि आदत बना लेनी होती है। ज्यादातर लोग अपनी छोटी आयु में इस लेवल पर फोकस होते हैं लेकिन जैसे जैसे आयु बढ़ती है उनमें किंतु परंतु की भावना बढ़ने लगती है। और इससे उसके स्वास्थ्य पर असर पड़ना शुरू हो जाता है। लेकिन अगर कोई व्यक्ति अपने ग्रह स्थिति के कारण इस लेवल पर फोकस हो लेकिन उसके कर्म उल्टे हों मतलब वह एक ही स्थान पर चिपक कर बैठा रहे या उसके हालत उसे मजबूर कर दे तो वह ज्यादा खाने पीने की और मुड़ जाता है और उसे यूरीन ट्रैक, या स्टोन या पाइल की समस्या या घबराहट की समस्या हो जाती है। अगर किसी का काम दौड़ धूप करने वाला हो और अगर वह लेवल दो पर फोकस हो तो वह अपने काम से खुश रहता है। नही तो नही। इसीलिए हमे अपने काम काज के हिसाब से अपना अपना लेवल फोकस कर लें तो हमे अपने काम में मजा आने लगता है और हम अपना काम ढंग से करके ज्यादा अच्छा परफॉर्म कर लेते हैं। नए नए जोड़ों में यह कई बार लड़ाई का कारण भी बनता है। क्योंकि जैसे ही स्त्री पुरष का संबध बनता है तो उनमें एक लेवल वन पर यानी सेक्स लेवल पर फोकस होता है उसे कमरे में घुस कर जी रहना पसंद होता है जबकि उसका पार्टनर लेवल दो पर फोकस हो जाता है और उसे इधर उधर घूमने की पड़ी होती है। यही कारण है कई बार कोई अच्छा खिलाड़ी शादी होने के बाद खेल में पिछड़ जाता है। लेवल तीन पर में पार्ट तीन में लिखूंगा।
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