प्रेमी प्रेमिका या पति पत्नी के अष्टकूट मिलान का मतलब ज्योतिष और मेडिकल साइंस और मनोविज्ञान के आधार पर विवेचन। जब स्त्री और पुरुष की कुंडली का मिलान किया जाता है तो इसका ज्योतिषीय और वैज्ञानिक आधार क्या होता है। ये हमारे आठ महत्वपूर्ण वैचारिक और शारीरिक मिलान का आधार होता है इनको मै क्रम से बताता हूं। 1. वर्ण :- वर्ण चार प्रकार के होते हैं ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, शूद्र। इनका बिगड़ा रूप ही आज की सामाजिक जाती व्यवस्था है। इनका मिलना इसलिए जरूरी है कि अगर ये समान हों तो स्त्री पुरष के कार्य करने का तरीका मिलता जुलता होता है। इसलिए दोनों को एक दूसरे के कार्य करने की समझ होती है। अगर ये मिल जाएं तो इसके 1/1 नंबर मिलते हैं। कुल मार्क्स =1 2. वश्य :- इसके अनुसार हर जन्म नक्षत्र का किसी एक जानवर के साथ स्त्री पुरष के स्वभाव की तुलना होती है। अगर एक बकरी दूसरा शेर से मिलता हो तो शेर बकरी को खा जाएगा मतलब दोनों पति पत्नी में से एक दूसरे पर पूरी तरह से हावी रहेगा । एक दबा रहेगा दूसरा उसको दबा कर रखेगा। इसको dominance फैक्टर कहा जाता है। इसके कुल नंबर =2 होते हैं। 3. तारा:- इसका मतलब किसी व्यक्ति का जीवन जीने का उद्देश्य क्या है यह पता चलता है। मान लो अगर यह गुण ना मिले तो क्या होगा। जैसे अगर पति धार्मिक स्वभाव का है और पत्नी को क्लब पसंद है तो उनमें मतभेद होना स्वाभाविक है। इसके कुल नंबर =3 4. योनि :- इसका मतलब पति पत्नी के लिंग और योनि का साइज मैच होता है कि नहीं। मान लें अगर पति की योनि अश्व या गज है तो उसका पेनिस साइज काफी बड़ा होगा नॉर्मल साइज से बड़ा और अगर पत्नी की योनि मुसक है मतलब चूहा । या जैसे पत्नी कि योनि कुत्ता या स्वान है और पति की वानर। मतलब कुता तो एक बार में तसल्ली से शारीरिक संबंध बना लेगा लेकिन वानर लगातार बंदर की तरह पूरा दिन रात उछल कूद मचाता रहेगा। फिर ऐसे पति पत्नी के शारीरिक संबंध ज्यादा संतुष्टि नहीं प्रदान करेंगे। इसलिए शारीरिक संबंध सुख के लिए योनि मिलान जरूरी है। इसके कुल नंबर =4 जैसे मेरे पास अगर कोई स्त्री या पुरूष बिना कोई परफ्यूम लगाए आए तो मैं उसके शरीर की खुशबू से उसके लिंग या योनि का साइज का पता लगा लेता हूं। क्योंकि योनि के आधार पर हर व्यक्ति के शरीर की खुशबू अलग अलग होती है। 5. ग्रह मैत्री :- इसका मतलब यह है कि पति पत्नी की राशियों के स्वामी ग्रह आपस में मित्र हैं या शत्रु। अगर मित्र है तो उनमें भी मित्र वत रिश्ते होंगे नहीं तो नहीं। कुल नंबर =5 6. गण ::- गण तीन प्रकार के होते हैं देव,मनुष्य, राक्षस । इससे व्यक्ति के खाने पीने कि आदत मिलती है। जैसे राक्षस गण तामसिक भोजन करना पसंद करते हैं और देव गण सात्विक। कुल नंबर =6 7. भकूट :- इसका मतलब की पति पत्नी का प्रेम दिल से है कि सामाजिक दिखावा। इसके कुल नंबर =7 8. नाड़ी:- नाड़ी तीन प्रकार की होती है। Anty, मध्य , आदि। इसका मतलब पति पत्नी के बायलॉजिकल स्ट्रक्चर में अंतर है या नहीं या समझे जेनेटिक्स में कितना अंतर है। अगर यह अंतर सही है तो संतान स्वस्थ होती है नहीं तो संतान प्राप्ति में कोई समस्या रहती है। नाड़ी बराबर नहीं होनी चाहिए। इसके कुल नंबर =8 इस प्रकार से सबके नंबर मिला कर हुए 36 इन्हीं को गुण कहते है। इनके अलावा यह अलग से देखा जाता है कि मांगलिक हैं या नहीं। मांगलिक का प्रभाव 28 वर्ष आयु के बाद लगभग समाप्त हो जाता है। मांगलिक होने का मेडिकल साइंस में मतलब होता है कि जो लोग मांगिलक होते हैं उनकी शारीरिक संबंध बनाने की बहुत ज्यादा इच्छा होती है। ऐसे व्यक्ति हर समय शारीरिक संबंध बनाने के लिए तैयार रहते हैं। अगर पति पत्नी दोनों मांगलिक ना हों तो extramarital रिश्ते बनने की संभावना होती है जिस कारण कई बार लड़ाई झगड़े , अलगाव, या आत्महत्या जैसी स्थिति उत्पन्न हो जाती है। लेकिन अगर बड़ी आयु जैसे 28-30 साल के बाद शादी हो तब तक दोनों स्त्री पुरष इन मामलों में मेच्योर हो चुके होते हैं।इसलिए कोई ज्यादा समस्या नहीं होती।
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