ज्योतिष, वैदिक और मेडिकल आधार पर जीवन के मुख्य तीन गुण ब्रम्ह, विष्णु और रुद्र या तम, रज और सत्व गुणों का विवेचन:- ज्योतिष में हर व्यक्ति का एक गुण देखा जाता है कि उसका गण क्या है। ज्योतिष में गण तीन प्रकार के होते हैं। देव, मनुष्य और राक्षस। इनको वेदों के अनुसार हमारी तीन प्रमुख ग्रंथियों से जोड़ कर देखा जाता है। पहली ग्रंथि ( अटैचेड चित्र में देखें) ब्रम्ह ग्रंथि इसमें मेडिकल साइंस के आधार पर हमारी एंडोक्राइन ग्लैंड टेस्टिस पुरष में ओवरी स्त्री में, और रेनल ग्लैंड आ जाती है। ब्रम्ह का अर्थ जीवन का निर्माण और सुरक्षा। क्योंकि नया जीवन निर्माण में टेस्टिस और ओवरी का होना जरूरी है और जीवन की सुरक्षा के लिए साहस, उत्साह और भय का होना भी जरूरी है हमारी रेनल ग्लैंड से ही साहस, उत्साह,भय के हार्मोन्स रिलीज होते हैं। इन्हीं गुणों के कारण कोई भी जीव अपनी सुरक्षा करता है। इसीलिए ब्रम्ह ग्रंथि सृष्टि में जीवन उत्पन करने और उसकी सुरक्षित करने के लिए जरूरी है। अब जन्म नक्षत्र और ग्रह स्थिति के अनुसार जो व्यक्ति सिर्फ सेक्स और अपने जीवन की रक्षा और सिर्फ अपनी व्यक्तिगत जरूरत तक ही सीमित होता है तो उस केस में ज्योतिष के अनुसार अगर उसकी जन्म कुंडली देखी जाए तो लगभग निश्चित होता है कि उसका गण राक्षस ही होगा। ऐसा व्यक्ति हर काम में सिर्फ अपना स्वार्थ सबसे पहले देखता है। इसीलिए मैने देखा है कि अधिकतम आजकल के सफल लोग राक्षस गण वाले जन्म नक्षत्र में उत्पन हुए लोग ही होते हैं। अगर उनकी ग्रह दशा भी अच्छी चली हो तब। इस गण में उत्पन हुए लोग अगर पारिवारिक कारणो या किसी ग्रह दशा के कारण या सतयुगी ज्योतिष ज्ञानी के कहने पर नॉन वेज खाना छोड़ दें तो उनका समय बुरा बीतता है। अब दूसरी ग्रंथि विष्णु ग्रंथि पर आते है। इस ग्रंथि के तहत हमारी एंडोक्राइन ग्लैंड पैनक्रियाज और थाइमस आ जाती है। जिस व्यक्ति का जन्म नक्षत्र के अनुसार मनुष्य गण निकलता है उन लोगो का फोकस इस ग्रंथि पर होता है। ऐसे लोग मनुष्यों के गुण धर्म वाले या समझे रज गुण वाले होते है। ये लोग सिर्फ अपना और अपने प्रियजनों के बारे में ही सोचते हैं। इन लोगों में थोड़ी बहुत दया और करुणा की भावना भी होती है लेकिन सिर्फ अपनो के लिए। अब तीसरी ग्रंथि रुद्र ग्रंथि पर आते हैं। इसके तहत हमारी एंडोक्राइन ग्लैंड थायरॉयड और पिट्यूटरी ग्लैंड आ जाती है। जैसा कि मैने लेवल सिस्टम में बताया था कि थायरॉयड या लेवल पांच पर हम करुण और दयालु बन जाते हैं। और छठे लेवल पर ज्ञानी। जिस व्यक्ति का जन्म नक्षत्र ऐसा हो कि उसका गण देव निकले वह इस ग्रंथि पर फोकस हो सकता है। ऐसा व्यक्ति समाज और देश हित में काम करता है वह किसी का दुख नहीं देख सकता वह दूसरों के लिए त्याग कर सकता है। यह सत्व गुण कहलाता है। इसीलिए मैं जब कोई मनुष्य गण या देव गण के व्यक्ति की कुंडली देखता हूं जिसको सांसारिक इच्छाओं को पूरा करने में समस्या आ रही हो तो मैं उसको nonveg खाने को कहता हूं। इससे थोड़ी मानसिक तनाव तो बढ़ता जरूर है लेकिन कम से कम उसका काम धंधा चल पड़ता है। अब आज के युग में सिर अध्यात्म से तो पेट नहीं भरता। जबकि राक्षस गण वाले व्यक्ति अपना कुछ ना कुछ जुगाड आज के युग में बिठा ही लेते है। बेशक उनकी ग्रह दशा बहुत खराब ना चली हो। कृप्या अपनी कुंडली में सिर्फ एक यही फैक्टर देख कर किसी निर्णय पर ना पहुंचे। यह एक फैक्टर है ऐसे ही और बहुत से फैक्टर्स होते हैं जिनके आधार पर किसी की कुंडली का अध्ययन किया जाता है।
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